Shaheed Kosh

इनके व्यक्तित्व के बारे में कोई भी तथ्य छूट गया हो या कोई तथ्य त्रुटिपूर्ण तो कृपया ज़रूर बतायें

शचींद्रनाथ सान्याल का जन्म 1893, में वाराणसी में हुआ था | स्वतंत्रता संग्रामी सचिंदर नाथ सान्याल एक स्वतंत्रता संग्रामी थे, जिन्होंने देश के लिए अपने जीवन के 20 साल ब्रिटिश जेलों में गुजार दिए। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी उनको डिफेंस ऑफ इंडिया रूल के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वह सुलतानपुर के जेल में भी रहे। काकोरी कांड और बनारस षड्यंत में भी उन्होंने दो बार काला पानी की जेल काटी। वे क्वींस कालेज बनारस में अपने अध्ययनकाल में उन्होंने काशी के प्रथम क्रांतिकारी दल का गठन 1908 में किया । 1913 में फ्रेंच बस्ती चंदननगर में सुविख्यात क्रांतिकारी रासविहारी बोस से उनकी मुलाकात हुई। कुछ ही दिनों में काशी केंद्र का चंदननगर दल में विलय हो गया ओर रासबिहारी काशी आकर रहने लगे । शचींद्र बंगाल आर्डिनेंस के अधीन गिरफ्तार कर लिए गए । उनकी गिरफ्तारी के पहले 'दि रिह्वलूशनरी' नाम का पर्चा पंजाब से लेकर वर्मा तक बँटा। इस पर्चे के लेखक और प्रकाशक के रूप में बाँकुड़ा में शचींद्र पर मुकदमा चला | इसके बाद 1927 में बहुचर्चित काकोरी कांड में अहम भूमिका निभाई। इस कांड में भी उनको काले पानी की सजा हुई। सजा पूरी होने के बाद सान्याल ने बनारस से अग्रगामी न्यूजपेपर की शुरूआत की। बतौर चीफ एडिटर रहे और इसी दौरान बंदी जीवन पुस्तक लिखी। जो काफी चर्चित रही। पंजाब, दिल्ली और बंगाल में उनके आने पर रोक लगी थी। 1941 में दूसरे विश्व युद्ध में उनको गिरफ्तार किया गया। इस परिवार में वह अकेले ही देशभक्त नहीं थे। उनके तीन अन्य भाई रविंदर नाथ सान्याल, जतिन्द्र नाथ सान्याल और भूपिंदर नाथ सान्याल भी आजादी की लड़ाई में गिरफ्तार हुए। जेलों में रहे। कालापानी के कारावास में रहते हुए शचीन्द्रनाथ सान्याल रोग से ग्रसित हो गए | भारतवर्ष में उन्हें भवाली के स्वास्थ्यगृह में रखा गया; पर कोई अच्छा परिणाम नहीँ निकला | भवाली से वे अपने भाई के पास गोरखपुर पहुँच गए और सन १९४५ में उनका मृत्यु हो गया | इस प्रकार दो – दो बार कालापानी के कारावास का दंड भुगतनेवाला और अपनी हर साँस का उपयोग देश की आजादी के लिए करने वाला यह महावीर स्वतंत्रता प्राप्ति के दो वर्ष पूर्व ही संसार से विदा होकर एक प्रेरक याद हमारे लिए छोड़ गया | http://www.bhaskar.com/ COURTESY: 'KRANTIKARI KOSH' Edited by Shrikrishna Saral & Published by Prabhat Prakashan

General Administration Department
Goverment of NCT of Delhi