Shaheed Kosh

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उधमसिंह कसैल का जन्म अमृतसर जिले के "कसैल " गांव में हुआ था | युवावस्था में व्यवसाय करने के उद्देश्य से ये अमेरिका चले गए | अमेरिका में ग़दर की लहर फैली और उस लहर में उधम सिंह भी सराबोर हो गए | सैकड़ों ग़दर वीरों के साथ सन १९१४ में तोशामारू जहाज द्वारा भारत के लिए रवाना हो गए | कलकत्ता में उनको गिरफ्तार करके पंजाब के जेल में भेज दिया गया | प्रथम लाहौर षड्यंत केस के अंतर्गत ऊधमसिंह पर मुकदमा चलाया गया और आजीवन कारावास का दंड देकर १० दिसंबर, १९१५ को अंडमान की जेल में भेज दिया गया | भारत सरकार की परिवर्तित नीति के फलस्वरूप उधम सिंह को अंडमान जेल से हटाकर मद्रास की वलारी जेल में रख दिया गया | जेल में उधम सिंह ने अपना कमाल दिखाया और कोठरी में ताला पड़ा रह गया और वे भाग निकले | अकथनीय कठिनाइयों का सामना करते हुए उधम सिंह पंजाब पहुंचे | पंजाब उस समय सुरक्षित नहीं था | पंजाब से पेशावर होते होते हुए सन १९२२ में उधम सिंह अफगानिस्तान जा पहुंचे और वहां पहुंचकर छदम नाम से किरती अखबार निकालकर माक्सवादी के सिद्धान्तों का प्रचार करने लगे |अफगानिस्तान से उधमसिंह एक बार भारत आये और कुछ दिन रहकर फिर वापस अफगानिस्तान चले गए | पुलिस को उनकी बहुत आवश्यकता थी | जब उधम सिंह दूसरी बार अफगानिस्तान से भारत लौट रहे थे तो सरहद पर किसी ने उन्हें गोली मार दी | गोली किसने मारी , यह भी रहस्य बना रहा | आज़ादी का एक दीवाना देश का चिंतन करता हुआ रहस्यात्मक ढंग से शहीद हो गया |COURTESY: 'KRANTIKARI KOSH' Edited by Shrikrishna Saral & Published by Prabhat Prakashan

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