Shaheed Kosh

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प्रसिद्ध क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर (बाबा सावरकर) का जन्म 1879 ई. में महाराष्ट्र राज्य के नासिक नगर के निकट भागपुर नामक स्थान में हुआ था। नासिक में ही उनकी शिक्षा हुई। आरंभ में उनकी रुचि धर्म, योग, जप, तप आदि विषयों की ओर थी। महाराष्ट्र में उस समय ‘अभिनव भारत’ नामक क्रांतिकारी दल काम कर रहा था। विनायक सावरकर इस दल से संबद्ध थे। वे जब इंग्लैण्ड चले गए तो उनका काम बाबा सावरकर ने अपने हाथों में ले लिया। वे विनायक की देशभक्ति रचनाएँ और उनकी इंगलैण्ड से भेजी सामग्री मुद्रित कराते, उसका वितरण करते और ‘अभिनव भारत’ के लिए धन एकत्र करते। यह कार्य सरकार की दृष्टि से ओझल नहीं रहा। गणेश दामोदर सावरकर को उतेजक कविताएं लिखने के अपराध में 1909 में गिरफ्तार किए गया । देशद्रोह का मुक़दमा चला उसे कालेपानी के आजन्म कारावास का उपहार मिला था |आजीवन कारावास की सज़ा देकर उन्हें अंडमान भेज दिया गया । सुनने में यह अवश्य ही विचित्र - सा लगेगा कि न तो उसने किसी कि हत्या कि थी और न ही कोई अपराध , फिर भी उसे आजन्म कारावास का दंड दिया गया था | उसका अपराध इतना था कि अपनी मातृभाषा मराठी में देशभक्तिपूर्ण कविताएँ लिखी थीं और ब्रिटिश हुकूमत ने उस पर इल्जाम लगाया था कि उसने अंग्रेजी साम्राज्य के विरूद्ध युद्ध छेड़ने का अपराध किया हैं | 1921 में अंडमान से भारत लाए गए और एक वर्ष साबरमती जेल में बंद रहें | आखिरकर जेल में होने वाले उत्पीडन से वह बीमार पड़ गए और उसके बचने की कोई आशा नही रही | उसकी बीमारी का समाचार जान देशवासियों को मिला तो एक आंदोलन उठ खड़ा हुआ और ब्रिटिश हुमूकत को उसे १९२२ में छोड़ना पड़ा | गणेश सावरकर डॉ. हेडगेवार के संपर्क में आए गणेश दामोदर सावरकर ने अनेक पुस्तकें लिखीं। दुर्गानंद के छद्म नाम से उनकी पुस्तक ‘इंडिया एज़ ए नेशन’ सरकार ने जब्त कर ली थी। वे हिन्दू राष्ट्र और हिन्दी के समर्थक थे। 16 मार्च 1945 को उनका देहांत हो गया। COURTESY: 'KRANTIKARI KOSH' Edited by Shrikrishna Saral & Published by Prabhat Prakashan Wikipedia , http://bharatdiscovery.org/

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