Shaheed Kosh

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श्री विचित्र कवि का पूरा नाम ईश्वर लाल अरोड़ा विचित्र कवि है| वे मूल रूप से कांकरोली के रहने वाले थे| लेकिन सन 1936 ने कांकरोली से नाथद्वारा चले गए| उनकी शिक्षा तो सामान्य ही हुई थी, लेकिन उनमे जन्मजात काव्य प्रतिभा थी| सन 1938 में जब प्रजामण्डल का आंदोलन शुरू हुआ तो विचित्र कवि प्रो. नारायणदास अरोड़ा और रघुनाथ पालीवाल की प्रेरणा से उसमे शामिल हो गए| उन्हें 3 महीने की सख्त सज़ा देकर कुंभगढ़ भेज दिया गया| लेकिन सज़ा समाप्त होने पर उन्हें साढ़े चार महीने के लिए फिर गिरई जेल में बदल दिया गया| विचित्र कवि कुल साढ़े सात महीने तक जेल में रहे| जेल से मुक्त होने के बाद विचित्र कवि हरिजन सेवा और अन्य रचनात्मक कार्यो में लगे रहे|

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