Shaheed Kosh

इनके व्यक्तित्व के बारे में कोई भी तथ्य छूट गया हो या कोई तथ्य त्रुटिपूर्ण तो कृपया ज़रूर बतायें

गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई सन 1866 को रत्नागिरी के कोटलुक गांव में हुआ | उनके पिता कृष्णराव व माता सत्यभामा थी | माता – पिता अत्यंत सरल स्वभाव के थे. उन्होंने गोखले को बचपन से ही देश – जाति के प्रति निष्ठा, विनम्रता जैसे गुणों की शिक्षा दी | पिता की असमय मृत्यु के कारण गोखले को शिक्षा प्राप्त करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, बड़े भाई गोविन्द 15 रूपये महीना की नौकरी करते थे जिसमे से वे हर माह 8 रूपये गोखले को भेजने लगे ताकि उनकी शिक्षा में व्यवधान न पड़े. गोखले यह अनुभव करते थे की भाई किस कठिनाई से उनकी सहायता कर रहे है. अत्यंत संयमित जीवन व्यतीत करते हुए उन्होंने साधनों के अनुरूप अपने को ढाला , ऐसा समय भी आया जब वे भूखे रहे और उन्हें सड़क की बत्ती के नीचे बैठकर पढाई करनी पड़ी | इन कठिन परिस्थितयो में भी उनका सम्पूर्ण ध्यान पठन – पाठन में लगा रहा | सन 1884 में उन्होंने मुंबई के एलफिंस्टन कॉलेज से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की उसके बाद गोखले का अंग्रेजी भाषा पर असाधारण अधिकार था लेकिन गणित और अर्थशास्त्र में उनकी अद्भुत पकड़ थी जिसके बल पर वे तथ्यो व आकड़ो का विश्लेषण और उनकी विवेचना विद्तापूर्ण ढंग से करते थे | इतिहास के ज्ञान ने उनके मन में स्वतंत्रता व प्रजातंत्र के प्रति निष्ठा उत्पन्न की | स्नातक होने के पश्चात् गोखले भारतीय प्रशासनिक सेवा, इंजीनियरिंग या वकालत जैसा लाभदायक व्यवसायों में जा सकते थे किन्तु इस विचार से की बड़े भाई के ऊपर और आर्थिक बोझ न पड़े उन्होंने इन अवसरों को छोड़ दिया | वे सन 1885 में पुणे के न्यू इंग्लिश कॉलेज में अध्यापन कार्य करने लगे | इस कार्य में उन्होंने स्वयं को जी – जान से लगा दिया और एक उत्कृष्ट शिक्षक साबित हुए | वर्ष 1885 में गोखले पुणे चले गए और डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी के अपने सहयोगियों के साथ फर्ग्यूसन कॉलेज के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। गोपाल कृष्ण गोखले ने फर्ग्यूसन कॉलेज को अपने जीवन के करीब दो दशक दिए और कॉलेज के प्रधानाचार्य बने। इस दौरान वो महादेव गोविन्द रानाडे के संपर्क में आये। रानाडे एक न्यायाधीश, विद्द्वान और समाज सुधारक थे जिन्हे गोखले ने अपना गुरु बना लिया। गोखले ने पूना सार्वजनिक सभा में रानाडे के साथ काम किया और उसके सचिव बन गए। गोपाल कृष्ण गोखले ने 1886 में 20 साल की उम्र में सामाजिक जीवन में प्रवेश किया। उन्होंने ” ब्रिटिश शासन के अधीन भारत” पर एक सार्वजनिक भाषण दिया जिसकी बहुत सराहना हुई। गोखले ने बाल गंगाधर तिलक की साप्ताहिक पत्रिका “मराठा” के लिए नियमित रूप से लेख लिखे। अपने लेख के माध्यम से उन्होंने लोगों के अन्दर छिपी हुई देशभक्ति को जगाने की कोशिश की। जल्द ही गोखले डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी के सचिव के रूप में पदोन्नत किये गए। वर्ष 1894 में जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूना में अपने सत्र का आयोजन किया तब उन्हें स्वागत समिति का सचिव बनाया गया। इस सत्र के कारण गोखले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण सदस्य बन गए। गोखले पुणे नगरपालिका के दो बार अध्यक्ष चुने गए। कुछ दिनों के लिए गोखले बंबई विधान परिषद के एक सदस्य भी रहे जहाँ उन्होंने सरकार के खिलाफ अपनी बात रखी। वर्ष 1892 में गोखले ने फरग्यूसन कॉलेज छोड़ दिया। वह दिल्ली में इम्पीरियल विधान परिषद के सदस्य बने जहाँ वह देशवाशियों के हित के लिए अपनी बात रखी। गोखले को हमारे देश की आर्थिक समस्याओं की अच्छी समझ थी जिसे उन्होंने बहस के दौरान काफी चतुरता से प्रस्तुत किया। गोखले ने 1905 में ‘सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी’ नामक एक नई समिति की शुरुआत की। इस समिति ने कार्यकर्ताओं को देश की सेवा के लिए प्रशिक्षित किया। उसी वर्ष गोखले ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतियों पर किये जा रहे अनुचित व्यव्हार के सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट करने इंग्लैंड चले गए। 49 दिनों के अंतराल में उन्होंने 47 विभिन्न सभाओं को सम्बोधित कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। गोखले ने भारत में मूलभूत रूप से स्वराज या स्वशासन पाने के लिए नियमित सुधार की वकालत की। उन्होंने 1909 के ‘मोर्ले मिंटो सुधारों’ के प्रस्तुतीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो अंत में एक कानून बन गया। हालाँकि इन सुधारों ने भारत में सांप्रदायिक विभाजन का बीज बोया फिर भी उन्होंने सरकार के भीतर सबसे अधिक अधिकार वाली सीटों पर भारतीय पहुँच का अधिकार दे दिया और जिस वजह से उनकी आवाज सार्वजनिक हितों के मामले में और अधिक सुनी जाने लगी । गोपाल कृष्ण गोखले मधुमेह और दमा के मरीज थे और अत्यधिक बोलने से गोखले के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा और अंत में 19 फरवरी 1915 को उनकी मृत्यु हो गई। Source- http://hindi.culturalindia.net/ , , http://www.nayichetana.com/ , http://hindi.webdunia.com/

General Administration Department
Goverment of NCT of Delhi