Shaheed Kosh

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आचार्य जे. बी. कृपालानी का जन्म 1888 में हैदराबाद में हुआ था | उन्होंने पुणे के फरगूसन कॉलेज से स्नात्तक की परीक्षा उत्तीर्ण की और बाद में इतिहास और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम केसेनानी, गांधीवादी समाजवादी, पर्यावरणवादी तथा राजनेता थे। उनका वास्तविक नाम जीवटराम भगवानदास था। वे सन् 1947 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे जब भारत को आजादी मिली। जब भावी प्रधानमंत्री के लिये कांग्रेस में मतदान हुआ तो तो सरदार पटेल के बाद सबसे अधिक मत उनको ही मिले थे। किन्तु गांधीजी के कहने पर सरदार पटेल और आचार्य कृपलानी ने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया। कृपलानी ने 1912 से 1917 तक बिहार में 'मुजफ्फरपुर कॉलेज ' में अंग्रेजी और इतिहास के प्राध्यापक के रूप में अध्यापन कार्य किया। उन्होंने थोड़े समय के लिए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में भी पढ़ाया। कृपलानी चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मां गांधी के सम्पर्क में आये। उन्होंने 1920 से 1927 तक महात्मा गांधी द्वारा स्थापित गुजरात विद्यापीठ में प्राधानाचार्य के रूप में नौकरी की। 1936 में वे सुचेता कृपलानी के साथ विवाह सूत्र में बंध गए। कृपलानी ने 1934 से 1945 तक कांग्रेस के महासचिव के रूप मे सेवा की। उन्होंने 1921 से होने वाले कांग्रेस के सभी आन्दोलनों में हिस्सा लिया और अनेक बार जेल गये। सन् 1946 में उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। कांग्रेस के गठन और सरकार के संबंध को लेकर नेहरू और पटेल से मतभेद थे। अन्त में 1951 में उन्होंने कांग्रेस से अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 'विजिल' नाम से एक साप्ताहिक पत्र निकालना शुरू किया और 'कृषक मजदूर पार्टी' एक नई राजनैतिक पार्टी प्रारंभ की। कृपालीनी ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से 1954 में इस्ताफी दे दिया और बाकी दिन संसदीय कैरियर में स्वाधीन रहे। कृपलानी ने 1977 में जनता सरकार के गठन में अहम भूमिका निभायी। कृपलानी गांधीवाधी दर्शन के एक प्रमुख व्याख्याता थे और उन्होंने इस विषय पर अनेक पुस्तकें लिखीं। 19 मार्च 1982 को अहमदाबाद में उनका निधन हो गया | Source- http://bharatdiscovery.org/ , http://hindi.webdunia.com/, http://www.deepawali.co.in/ COURTESY: 'KRANTIKARI KOSH' Edited by Shrikrishna Saral & Published by Prabhat Prakashan

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