Shaheed Kosh

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डॉक्टर लक्ष्मी सहगल का जन्म 1914 में एक परंपरावादी तमिल परिवार में हुआ | उनके पिता मद्रास हाई कोर्ट में क्रिमिनल लॉयर थे उनका अपने इलाके में बहुत सम्मान था। मद्रास का रईस परिवार होने के नाते उन्होंने एमबीबीएस की डिग्री ली और 1938 में एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने डिप्लोमा इन गाइनिकोलॉजी भी किया। | वे बचपन से ही राष्ट्रवादी आंदोलन से प्रभावित हो गई थीं और जब महात्मा गाँधी ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आंदोलन छेड़ा तो लक्ष्मी सहगल ने उसमे हिस्सा लिया। वे 1943 में अस्थायी आज़ाद हिंद सरकार की कैबिनेट में पहली महिला सदस्य बनीं। एक डॉक्टर की हैसियत से वे सिंगापुर गईं थीं | जहां उन्होंने मजदूरों के लिए एक चिकित्सा शिविर लगाया और मजदूरों का इलाज किया। विदेश में मजदूरों की हालत और उनके ऊपर हो रहे जुल्मों को देखकर उनका दिल भर आया। उन्होंने निश्चय किया कि वह अपने देश की आजादी के लिए कुछ करेंगीं। लक्ष्मी के दिल में आजादी की अलख जग चुकी थी इसी दौरान नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का सिंगापुर आगमन हुआ। एक कार्यक्रम के दौरान 1943 में उनकी मुलाकात नेताजी से हो गयी फिर क्या था लक्ष्मी के कैप्टन लक्ष्मी बनने का रास्ता साफ हो गया। करीब एक घंटे की मुलाकात के बीच लक्ष्मी ने यह इच्छा जता दी कि वह उनके साथ भारत की आजादी की लड़ाई में उतरना चाहती हैं। लक्ष्मी के भीतर आजादी का जज्बा देखने के बाद नेताजी ने उनके नेतृत्व में रानी लक्ष्मीबाई रेजीमेंट बनाने की घोषणा कर दी जिसमें वह वीर नारियां शामिल की गयीं जो देश के लिए अपनी जान दे सकती थीं। बस फिर क्या था कैप्टन लक्ष्मी भारत लौटीं और देश की आजादी की लड़ाई में कूद पड़ीं। उनके नेतृत्व में आजाद हिन्द फौज की महिला बटालियन रानी लक्ष्मीबाई रेजीमेंट में कई जगहों पर अंग्रेजों से मोर्चा लिया और अंग्रेजों को बता दिया कि देश की नारियां चूडिय़ां तो पहनती हैं लेकिन समय आने पर वह बन्दूक भी उठा सकती हैं और उनका निशाना पुरूषों की तुलना में कम नहीं होता। देश आजाद होने ही वाला था कि लाहौर के कर्नल प्रेम कुमार सहगल से उनके विवाह की बात चली और उन्होंने हामी भर दी। वर्ष 1947 में उनका विवाह प्रेम कुमार के साथ हो गया तथा वह कैप्टन लक्ष्मी से कैप्टन लक्ष्मी सहगल हो गयीं। 1971 में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया ज्वाइंट कर ली तथा राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। वह ऑल इण्डिया डेमोक्रेटिक्स वोमेन्स एसोसिएशन की भी सदस्या और उन्होंने महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक स्वतंत्रता के लिए काफी संघर्ष किया। देश के प्रति उनके योगदान और उनके संघर्ष को देखते हुए राष्ट्रपति केआर नारायणनन ने उन्हें 1998 में पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित किया। एक लम्बे राजनीतिक जीवन को जीने के बाद 1997 में वह काफी कमजोर हो गयीं। उनके करीबी बताते हैं कि शरीर से कमजोर होने के बाद भी कैप्टन सहगल हमेशा लोगों की भलाई के बारे में सोचती थीं तथा मरीजों को देखने का प्रयास करती थीं। आखिरकार 19 जुलाई 2012 का वह दिन आ गया जब हृदय में तेज दर्द होने के बाद उन्हें चिकित्सालय ले जाया गया। कानपुर में 23 जुलाई 2012 की सुबह उन्होंने अन्तिम सांस ली | आज़ाद हिंद फ़ौज की रानी झाँसी रेजिमेंट में लक्ष्मी सहगल बहुत सक्रिय थी । बाद में उन्हें कर्नल का ओहदा दिया गया लेकिन लोगों ने उन्हें कैप्टन लक्ष्मी के रूप में ही याद रखा। Source- http://hindi.oneindia.com/ ,

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