Shaheed Kosh

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– बाबा सोहन सिंह भकना का जन्म जनवरी, 1870 ई. में अमृतसर ज़िले, पंजाब के 'खुतराई खुर्द' नामक गाँव में एक संपन्न किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम भाई करम सिंह और माँ का नाम राम कौर था। सोहन सिंह जी को अपने पिता का प्यार अधिक समय तक प्राप्त नहीं हो सका। जब वे मात्र एक वर्ष के थे, तभी पिता का देहांत हो गया। उनकी माँ रानी कौर ने ही उनका पालन-पोषण किया। आंरभ में उन्हें धार्मिक शिक्षा दी गई। ये शिक्षा उन्होंने गाँव के ही गुरुद्वारे से प्राप्त की। ग्यारह वर्ष की उम्र में प्राइमरी स्कूल में भर्ती होकर उन्होंने उर्दू पढ़ना आंरभ किया। सोहन सिंह भकना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी थे। वे गदर पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष थे तथा सन् १९१५ के गदर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार थे। लाहौर षडयंत्र केस में आजीवन कारावास हुआ और सोलह वर्ष तक जेल में रहने के बाद सन् १९३० में रिहा हुए। बाद में वे भारतीय मजदूर आन्दोलन से जुड़े तथा किसान सभा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को अपना अधिकांश समय दिया। सोहनसिंह भकना के ऊपर आजादी का नशा चढ़ गया | उसने घूम – घूमकर अमेरिका और कनाडा में ग़दर पार्टी की कई शाखाएँ कायम कर दी | ग़दर नाम का अखबार उनकी पार्टी का मुख पत्र था | उसने निश्चय किया कि हजारो की संख्या में प्रभावी भारतीय लोग को लेकर आजादी की लड़ाई में भाग लेन के लिए हिंदुस्तान जाएगा | सोहन सिंह के लिए सुनहरा दिन था जब वो जहाज द्वारा हिंदुस्तान जा रहा था | अंग्रेजों को इन क्रांतिकारियों को की गंध लग चुकी थी | बंदरगाह पर जहाज लगते ही अंग्रेज पुलिस ने घेर लिया | कुछ लोग जैसे तैसे भाग निकले, पर सोहनसिंह इस यत्न में सफल नही हो सकें और गिरफ्तार हो गए | 16 वर्ष जेल मे बिताने पर भी अंग्रेज़ सरकार का इरादा उन्हें जेल में ही सड़ा ड़लने का था। इस पर बाबा सोहन सिंह ने अनशन आरम्भ कर दिया। इससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। यह देखकर अततः अंग्रेज़ी सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया। रिहाई के बाद बाबा सोहन सिंह 'कम्युनिस्ट पार्टी' का प्रचार करने लगे। द्वितीय विश्व युद्ध आंरभ होने पर सरकार ने उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन सन 1943 में रिहा कर दिया। 20 दिसम्बर, 1968 को बाबा सोहन सिंह भकना का देहांत हो गया। Source- http://bharatdiscovery.org/, COURTESY: 'KRANTIKARI KOSH' Edited by Shrikrishna Saral & Published by Prabhat Prakashan

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